मेरे काव्य संग्रह "सुख का सूरज से
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एक ग़ज़ल
"गीत गाना आ गया है"
अब हमें बातें बनाना आ गया है,
पत्थरों को गीत गाना आ गया है।
हसरतें छूने लगी आकाश को,
प्यार करने का ज़माना आ गया है।
लक्ष्य था मुश्किल, पहुँच से दूर था,
साधना हमको निशाना आ गया है।
मन-सुमन वीरान उपवन थे पड़े,
पंछियों को चहचहाना आ गया है।
हाथ लेकर हाथ में जब चल पड़े,
साथ उनको भी निभाना आ गया है।
ज़िन्दग़ी के जख़्म सारे भर गये,
घोंसला हमको सजाना आ गया है।
जब चटककर “रूप” कलियों ने निखारा,
साज गुलशन को बजाना आ गया है।