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Friday, March 6, 2015

“फागुन सबके मन भाया है” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक')

होली आई, होली आई,
गुजिया, मठरी, बरफी लाई

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मीठे-मीठे शक्करपारे,
सजे -धजे पापड़ हैं सारे,

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चिप्स कुरकुरे और करारे,
दहीबड़े हैं प्यारे-प्यारे,
 
chips 
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तन-मन में मस्ती उभरी है,
पिस्ता बरफी हरी-भरी है.

Pista-Barfi
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पीले, हरे गुलाल लाल हैं,
रंगों से सज गये थाल हैं.
 
holi (3) 
कितने सुन्दर, कितने चंचल,
हाथों में होली की हलचल,

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फागुन सबके मन भाया है! 

होली का मौसम आया है!!

2 comments:

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