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Monday, November 4, 2013

"तुम्हें प्यार नही करते हैं" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

मेरे काव्य संग्रह "सुख का सूरज" से
एक गीत

"
तुम्हें प्यार नही करते हैं"

नैन मटकाते हैं ,
इजहार नही करते हैं।
सिर हिलाते है,
वो इन्कार नही करते हैं।

रोज टकराते हैं,
पगडण्डी पे आते-जाते,
इतने खुद्दार है,
इसरार नही करते हैं।

देखते हैं मुझे,
ऊपर से ही चोरी-चोरी,
क्यों है नफरत,
जो नजर चार नही करते हैं।

मैं पहल कैसे करूँ,
मेरी भी मजबूरी है,
कितने मगरूर हैं,
इकरार नही करते है।

कब तलक लोगे परीक्षा,
यूँ ही जज्बातों की,
जाओ पत्थर हो,
तुम्हें प्यार नही करते हैं।

9 comments:

  1. पर दिल पत्थर से लग जाए तो क्या कीजे ...
    भाव मय प्रस्तुति शास्त्री जी ... नमस्कार ...

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  2. वाह बेहद उम्दा प्रेमभरी प्रस्तुति

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  3. वाह मजेदार प्रस्तुति-
    दीप पर्व की शुभकामनायें आदरणीय-

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  4. नैन मटकाते हैं ,
    इजहार नही करते हैं।
    सिर हिलाते है,
    वो इन्कार नही करते हैं।

    रोज टकराते हैं,
    पगडण्डी पे आते-जाते,
    इतने खुद्दार है,
    इसरार नही करते हैं।सुन्दर मनोहर रागात्मक प्रस्तुति।

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  5. अभिमान,संकोच और प्रेमराग से भरपूर रचना |
    दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं !
    नई पोस्ट आओ हम दीवाली मनाएं!

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  6. अच्छी कविता के लिए ..... बधाई

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